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motivational story about positive thinking, we should understand the situation and then take any action, prerak prasang | बिना सोचे-समझे किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए, परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी


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एक घंटा पहले

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  • एक राजा ने महल के द्वार पर लिखवाया एक सूत्र और घोषणा कर दी कि जो भी इस सूत्र को हल करेगा, उसे राज्य का अगला उत्तराधिकारी बना दिया जाएगा

पुराने समय में एक राजा की कोई संतान नहीं थी। उसकी राजा-रानी इस बात से बहुत दुखी रहते थे। बुढ़ापे में राजा को इस बात की चिंता सताने लगी कि राज्य का अगला राजा कौन बनेगा? तभी मंत्रियों ने सलाह दी कि हमें राज्य के किसी योग्य व्यक्ति को उत्तराधिकारी घोषित कर देना चाहिए।

राजा को मंत्रियों की बात पसंद आई। उन्होंने योग्य व्यक्ति के चयन के लिए एक परीक्षा रखी। राजा ने अपने महल के बंद द्वार पर गणित का एक सूत्र लिखवा दिया और राज्य में घोषणा करवा दी कि जो व्यक्ति इस सूत्र को हल कर लेगा, उसके लिए ये द्वार अपने आप खुल जाएंगे और उसे राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा।

ये घोषणा सुनते ही राज्य के बड़े-बड़े गणितज्ञ और अन्य बुद्धिमान लोग महल के द्वार तक पहुंच गए। सभी लोग द्वार के पास खड़े होकर सूत्र को हल करने की कोशिश करने लगे। सुबह से शाम हो गई, लेकिन कोई व्यक्ति ये सूत्र हल नहीं कर पा रहा था। वहीं दूर एक लड़का भी ये सब देख रहा था। शाम को सभी लोग हार अपने-अपने घर लौट गए। तब वह लड़का आया और उसने धीरे से दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया।

दरवाजा खुलने के बाद लड़का महल के अंदर पहुंच गया। जब राज्य के लोगों को ये बात मालूम हुई तो सभी ये जानने के लिए महल पहुंच गए कि लड़के ने सूत्र कैसे हल किया? राजा ने भी उस लड़के से पूछा कि तुमने ये सूत्र कैसे हल किया?

लड़के ने कहा कि मैं सभी को सूत्र हल करते हुए देख रहा था। लेकिन, बड़े-बड़े गणितज्ञ भी इस सूत्र को हल करने में सफल नहीं हुए तो मैंने तो सोचा कि हो सकता है कि ये सूत्र ही सही न हो। द्वार का सूत्र से कोई संबंध ही ना हो। ये सोचकर मैंने द्वार को खोलने की कोशिश की और द्वार खुल गया। वास्तव में ये सूत्र था ही नहीं। राजा लड़के की बात सुनकर बहुत खुश हुए और उन्होंने उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

सीख- राजा ने सिर्फ तर्क शक्ति परखने के लिए ऐसी परीक्षा रखी थी। सिर्फ वह लड़का अपने बुद्धिमानी से परीक्षा में सफल हो सका, क्योंकि उसने परिस्थितियों को समझा। सूत्र और दरवाजा का कोई संबंध है भी या नहीं, ये परखने की कोशिश की और उसकी इसकी बुद्धिमानी से द्वार खुल गया। हमारे जीवन में भी कई बार ऐसा ही होता है। कोई परेशानी बहुत छोटी होती है, लेकिन अपने बिना सोचे-समझे उसे बड़ा मान लेते हैं और इस नतीजे पर पहुंच जाते हैं कि वे इसे हल नहीं कर पाएंगे। जबकि परिस्थितयों को समझकर आगे बढ़ने से सफलता जरूर मिल सकती है।



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