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aaj ka jeevan mantra by pandit vijayshankar mehta, motivational story of swami ramtirth, inspirational story about positive thinking | अपने देश, राज्य, नगर, संस्था या परिवार के लिए कोई बुरी बात सुनें तो इनकी प्रतिष्ठा बचाने के प्रयास तुरंत करें


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5 घंटे पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

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कहानी – स्वामी रामतीर्थ नाम के एक महान संत थे। जब वे जापान गए तो वहां एक दिन ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। उन्हें भूख लग रही थी। उस समय वे सिर्फ फल ही खाते थे। एक स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो वे तुरंत उतरे और स्टेशन पर फल खोजने लगे, लेकिन कहीं भी उन्हें अच्छे फल नहीं मिले, जो फल वहां बिक रहे थे, वे ठीक नहीं थे।

स्वामीजी फिर से ट्रेन में चढ़कर अपनी जगह पर बैठ गए। उन्होंने कहा, ‘शायद जापान में अच्छे फल नहीं मिलते हैं।’

ये बात वहीं बैठे एक जापानी युवक ने सुन ली, लेकिन वह उस समय कुछ बोला नहीं।

अगले स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो वह जापानी युवक तुरंत स्टेशन पर उतरा और अच्छे फलों की एक टोकरी लेकर आया। उसने ये टोकरी स्वामीजी को दे दी। स्वामीजी को लगा कि शायद ये कोई फल बेचने वाला है। उन्होंने लड़के को फलों के पैसे देने की कोशिश की, लेकिन लड़के ने कहा, ‘मुझे आपसे पैसे नहीं चाहिए। मैं बस इतना चाहता हूं कि जब आप अपने देश जाएं तो वहां ये न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते हैं।’

स्वामीजी उस लड़के की ये बात सुनते ही हैरान रह गए। उन्होंने ये किस्सा भारत आकर कई बार अपने शिष्यों को सुनाया। कैसे एक जापानी लड़का अपने देश के लिए इतना ईमानदार हो सकता है और इतना अच्छा सोच सकता है।

सीख – हमें भी अपने देश, राज्य, शहर, संस्था और घर-परिवार के लिए ईमानदार रहना चाहिए। जब भी कहीं कोई व्यक्ति इनके बारे में कोई गलत बात कहता है तो हमें इनकी प्रतिष्ठा बचाने के प्रयास तुरंत करने चाहिए। ताकि व्यक्ति की सोच बदल सके और हमारे देश, घर-परिवार की प्रतिष्ठा बनी रही।



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